पैकेट स्विचिंग डेटा को कुशल संचरण के लिए पैकेटों में तोड़ देती है। प्रत्येक पैकेट स्वतंत्र रूप से यात्रा करता है। यह अन्य पैकेटों से अलग मार्ग अपना सकता है। रिसीवर उन्हें पुनः संयोजित करता है। पैकेट स्विचिंग इंटरनेट की नींव है। यह कुशल, लचीला और स्केलेबल है।
पैकेट स्विचिंग का विकास पॉल बरन और डोनाल्ड डेविस ने 1960 के दशक में किया था। इसे सैन्य संचार के लिए डिज़ाइन किया गया था ताकि यह आंशिक रूप से नष्ट होने पर भी काम कर सके। यदि कोई एक नोड विफल हो जाता, तो पैकेट उसके चारों ओर से रूट हो सकते थे। ARPANET ने पैकेट स्विचिंग का उपयोग किया। इंटरनेट ने इसे अपनाया।
पैकेट स्विचिंग बनाम सर्किट स्विचिंग
- पैकेट: साझा पथ, कुशल, परिवर्तनीय विलंबता
- सर्किट: समर्पित पथ, अपव्यय, कम विलंबता
- पैकेट: इंटरनेट में उपयोग किया जाता है
- सर्किट: पारंपरिक टेलीफोनी में प्रयुक्त
पैकेट स्विचिंग पूरी तरह से सही नहीं है। इसमें विलंबता (लेटेंसी) परिवर्तनशील होती है। इसमें पैकेट खो सकते हैं। विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है। लेकिन यह सर्किट स्विचिंग से कहीं अधिक कुशल है। यह कई उपयोगकर्ताओं को एक ही नेटवर्क साझा करने की अनुमति देता है। इसके बिना इंटरनेट का अस्तित्व ही नहीं होता।
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