जल निकासी किसी स्थल या संरचना से अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है। निर्माण में पानी सबसे विनाशकारी कारक है। यह मिट्टी का कटाव करता है, नींव को कमजोर करता है, तहखानों में बाढ़ लाता है और सामग्रियों को सड़ा देता है। एक अच्छी जल निकासी प्रणाली पानी को इमारत से दूर और स्थल से बाहर ले जाती है। इसमें गटर, डाउनपाइप, फ्रेंच ड्रेन, स्वेल, कैच बेसिन, स्टॉर्म सीवर और रिटेंशन पॉन्ड शामिल हैं। यह एक संपूर्ण प्रणाली है, न कि कोई एक घटक। रसोई में, जल निकासी का अर्थ है सिंक, ड्रेनपाइप, गार्बेज डिस्पोजल और वेंट। यह रसोई से अपशिष्ट जल को बाहर निकालता है। यह बाढ़ को रोकता है। यह दुर्गंध को रोकता है। यही रसोई की जल निकासी प्रणाली है।
सतही जल निकासी सतह पर मौजूद पानी का प्रबंधन करती है। स्थल को इस प्रकार समतल किया जाता है कि पानी भवन से दूर बह जाए। स्वेल उथले चैनल होते हैं जो पानी को संग्रहण बेसिन या तूफानी नाले की ओर ले जाते हैं। भूमिगत जल निकासी सतह के नीचे के पानी का प्रबंधन करती है। फ्रेंच ड्रेन बजरी से भरी खाइयाँ होती हैं जिनमें छिद्रित पाइप लगे होते हैं जो भूजल को एकत्रित करके उसे बाहर ले जाते हैं। नींव की नालियाँ नींव के आधार के आसपास के पानी को एकत्रित करती हैं। रसोई में, सिंक की नाली एक भूमिगत नाली है। यह सिंक से पानी को सीवर तक ले जाती है। वेंट पाइप सिस्टम में हवा आने देता है। ट्रैप गैसों को बाहर रखने के लिए पानी को रोककर रखता है। यह प्रणाली सरल है। यह प्रणाली आवश्यक है।
जल निकासी की योजना बनाना आवश्यक है। मिट्टी का प्रकार, जलस्तर, वर्षा और स्थल की स्थलाकृति, ये सभी कारक मायने रखते हैं। जिस स्थल पर जल निकासी ठीक से नहीं होती, वहां बाढ़, कटाव और धंसाव हो सकता है। रसोई में, नाली का आकार सही होना चाहिए। उसमें उचित वेंटिलेशन होना चाहिए। उसमें उचित ट्रैप होना चाहिए। उसकी नियमित देखभाल आवश्यक है। चिकनाई और भोजन को नाली में नहीं डालना चाहिए। इससे नाली जाम हो जाएगी। जल निकासी ही व्यवस्था है। व्यवस्था ही सुरक्षा है। सुरक्षा ही जल निकासी है। रसोई ही इमारत है। रसोइया निर्माता है। नाली ही जल निकासी है। जल निकासी ही नाली है। पानी बहता है। पानी निकल जाता है। रसोई सूखी रहती है। रसोइया खुश रहता है। खाना स्वादिष्ट बनता है।
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