खेल के दौरान एक अधिकारी नियमों के उल्लंघन पर नज़र रखता है, निर्णय का संकेत देता है और खेल को नियंत्रण में रखता है। यही अधिकारी रेफरी कहलाता है। रेफरी के अधिकार से ही खेल निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ पाता है।
रेफरी के कर्तव्यों में नियमों का पालन करवाना, समय प्रबंधन करना, दुर्व्यवहार से निपटना और खिलाड़ियों तथा अन्य अधिकारियों से संवाद करना शामिल है। रेफरी की स्थिति और शारीरिक क्षमता महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे खेल में हस्तक्षेप किए बिना उसके करीब रहना होता है। संकेतों में निरंतरता और स्पष्टता खिलाड़ियों को असहमति होने पर भी निर्णयों को स्वीकार करने में मदद करती है।
वीडियो रिव्यू जैसी तकनीक अब कई खेलों में सहायक होती है, फिर भी मैदान पर मौजूद रेफरी ही अधिकांश तात्कालिक निर्णय लेता है। रेफरी के प्रति सम्मान ही सुचारू प्रतिस्पर्धा की कुंजी है। जब मैच सुचारू रूप से चल रहा होता है, तब अच्छे रेफरी लगभग अदृश्य होते हैं; लेकिन जब निर्णायक निर्णय लेने पड़ते हैं, तब उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
रेफरी के बिना, अधिकांश प्रतिस्पर्धी खेल शीघ्र ही अपनी संरचना खो देंगे।
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