एक धावक स्थानीय दौड़ में यह जानते हुए खड़ा है कि उसे केवल पदक और व्यक्तिगत संतुष्टि ही मिलेगी। वह प्रतियोगी शौकिया है। शौकिया धावक अपने प्रदर्शन के लिए कोई भुगतान प्राप्त किए बिना भाग लेते हैं।
एक समय ओलंपिक एथलीटों और पेशेवर खिलाड़ियों के बीच यही अंतर होता था, हालांकि कई खेलों में अब यह रेखा धुंधली हो गई है। आज भी कॉलेज एथलेटिक्स, कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और सामुदायिक लीगों में शौकिया खिलाड़ियों का दर्जा मायने रखता है। शौकिया खिलाड़ी अक्सर प्रशिक्षण के साथ-साथ नौकरी या पढ़ाई भी करते हैं और अपने उपकरण और यात्रा का खर्च खुद उठाते हैं।
प्रतियोगिता का शुद्ध स्वरूप आज भी कई लोगों को आकर्षित करता है। वेतन के दबाव के बिना, ध्यान सुधार, सौहार्द और प्रतियोगिता पर ही केंद्रित रहता है। शासी निकाय स्पष्ट नियम निर्धारित करते हैं कि किन खर्चों को वहन किया जा सकता है जिससे शौकिया खिलाड़ी का दर्जा खतरे में न पड़े।
खेल खेलने वाले अधिकांश लोग शौकिया तौर पर ऐसा करते हैं, और उनकी प्रतिबद्धता जमीनी स्तर पर खेलों को जीवंत बनाए रखती है।
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