बच्चे अनेक स्रोतों से व्यवहार करना सीखते हैं। माता-पिता शिष्टाचार सिखाते हैं। शिक्षक नियमों का पालन करवाते हैं। मित्र संगीत और कपड़ों के प्रति रुचि विकसित करते हैं। टेलीविजन और सोशल मीडिया रिश्तों का मॉडल प्रस्तुत करते हैं। ये सभी लोग और संस्थाएँ समाजीकरण के माध्यम हैं—वे चैनल जिनके द्वारा लोग अपने समाज के मानदंडों, मूल्यों और मान्यताओं को सीखते हैं।
समाजशास्त्री आमतौर पर इन्हें प्राथमिक और द्वितीयक कारकों में विभाजित करते हैं। परिवार प्राथमिक कारक है, विशेषकर प्रारंभिक बचपन में। स्कूल, सहकर्मी समूह, कार्यस्थल, धार्मिक संस्थान और जनसंचार माध्यम द्वितीयक कारक हैं। ये सभी अलग-अलग शिक्षाएँ प्रदान करते हैं। एक बच्चा घर पर आज्ञाकारिता, स्कूल में प्रतिस्पर्धा और मित्रों के बीच वफादारी सीख सकता है।
प्रमुख एजेंट
- परिवार: भाषा, बुनियादी मूल्य, भावनात्मक बंधन
- विद्यालय: अनुशासन, समय की पाबंदी, शैक्षणिक ज्ञान
- सहकर्मी समूह: पहचान, अपनापन, सामाजिक कौशल
- मीडिया: लैंगिक भूमिकाएँ, उपभोक्ता आदतें, राजनीतिक विचार
- धर्म: नैतिक ढाँचे, सामुदायिक अनुष्ठान
जीवनकाल के दौरान प्रत्येक कारक का प्रभाव बदलता रहता है। किशोरावस्था में साथियों का सबसे अधिक महत्व होता है। वयस्कता में कार्यस्थल का प्रभाव बढ़ जाता है। कोई भी कारक अकेले काम नहीं करता।
Comments (2)
Leave a comment