रिवेटिंग में धातु की प्लेटों को रिवेट नामक स्थायी धातु की पिनों से जोड़ा जाता है। रिवेट एक बेलनाकार शाफ्ट होता है जिसका एक सिरा होता है। इसे प्लेटों में बने छेदों से डाला जाता है। फिर पूंछ को मोड़कर दूसरा सिरा बनाया जाता है। रिवेट प्लेटों को आपस में कसकर जोड़ देता है। इसे तोड़े बिना निकालना संभव नहीं है। 19वीं और 20वीं शताब्दी में स्टील को जोड़ने की मानक विधि रिवेटिंग थी। इससे जहाज, पुल और गगनचुंबी इमारतें बनाई गईं। रसोई में, इसका सबसे करीबी उदाहरण पाई क्रस्ट को दबाना है। किनारों को एक साथ दबाया जाता है। उन्हें सील किया जाता है। उन्हें जोड़ा जाता है। यह रिवेटिंग नहीं है। लेकिन यह एक स्थायी जोड़ है। यह पाई की रिवेटिंग है। यह रसोई की रिवेटिंग है।
रिवेटिंग एक कुशल कारीगरी है। रिवेट लगाने वाला कारीगर रिवेट को गर्म करता है, उसे अंदर डालता है और फिर न्यूमेटिक हथौड़े से उसके पिछले हिस्से को ठोकता है। यह काम शोरगुल भरा, गर्म और शारीरिक मेहनत वाला होता है। रिवेट सही आकार और सही सामग्री का होना चाहिए। छेद सही सीध में और सही व्यास के होने चाहिए। रिवेट को छेद को पूरी तरह से भरना चाहिए। रसोई में, क्रिम्पिंग एक सरल तकनीक है। किनारों को कांटे से दबाया जाता है। किनारों को उंगलियों से दबाया जाता है। किनारों को सील कर दिया जाता है। पाई तैयार है। रिवेटिंग जोड़ है। क्रिम्पिंग जोड़ है। दोनों एक ही हैं।
रिवेटिंग के कई फायदे हैं। यह मजबूत, भरोसेमंद और स्थायी होती है। इसके लिए बिजली की आवश्यकता नहीं होती। इसे कहीं भी किया जा सकता है। यह अलग-अलग धातुओं को जोड़ सकती है। रसोई में क्रिम्पिंग के कई फायदे हैं। यह सरल, त्वरित और प्रभावी होती है। इसके लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती। इसे हाथ से किया जा सकता है। रिवेटिंग एक विधि है। क्रिम्पिंग एक विधि है। दोनों एक ही हैं। रसोई एक ही है। रसोई रिवेटिंग है। रिवेटिंग रसोइया है। रसोइया रिवेटिंग है। रिवेटिंग एक ही है। भोजन एक ही है। भोजन रिवेटिंग है। रिवेटिंग एक ही है।
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