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📏 सामाजिक मानदंड

समाज में व्यवहार की एक साझा अपेक्षा।

सामाजिक मानदंड

सामाजिक मानदंड समाज में व्यवहार की साझा अपेक्षा होती है। यह लोगों को बताता है कि किसी विशेष परिस्थिति में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। मानदंड कानून नहीं होते, हालांकि कुछ कानून बन जाते हैं। इन्हें दंडों द्वारा लागू किया जाता है: अनुरूपता के लिए पुरस्कार और विचलन के लिए दंड।

नियमों का महत्व अलग-अलग होता है। लोक रीति-रिवाज रोज़मर्रा की प्रथाएँ हैं। लोक-परंपराएँ गहन नैतिक मानदंड हैं। वर्जनाएँ इतनी सख्त पाबंदियाँ हैं कि उनका उल्लंघन अकल्पनीय है। कानून राज्य द्वारा लागू किए गए संहिताबद्ध नियम हैं। संदर्भ के अनुसार भी नियम बदलते रहते हैं। जो बात किसी अंतिम संस्कार में उचित हो, वह किसी पार्टी में उचित नहीं होती।

मानदंडों के प्रकार

सामाजिकरण के माध्यम से नियम सीखे जाते हैं। ये आंतरिक रूप से समाहित हो जाते हैं, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे इनका पालन करते हैं। जब नियम टूट जाते हैं, तो समाज में अराजकता फैल जाती है—नियमहीनता का भाव उत्पन्न होता है। नियम ही वह बंधन हैं जो सामाजिक जीवन को एकजुट रखते हैं।


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Comments (3)

  1. Dr. Karen W.
    Social norms are powerful because they're enforced by informal sanctions. A dirty look can be as effective as a fine.
  2. Luis M.
    Norms vary so much across cultures. What's polite in one place is rude in another. Travel teaches you that fast.
  3. Brenda K.
    The pandemic shifted a lot of social norms around personal space and greetings. Some of those changes might stick permanently.

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