डीप फ्राइंग में भोजन को पूरी तरह से गर्म तेल में डुबोकर पकाया जाता है। तेल को 160 से 190 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है। भोजन को तेल में डाला जाता है। सतह सूखकर भूरी हो जाती है। अंदर का भाग भाप से पकता है। परिणामस्वरूप, एक कुरकुरी, सुनहरी परत और अंदर से नरम, मुलायम भोजन प्राप्त होता है। फ्रेंच फ्राइज़, फ्राइड चिकन, डोनट्स और टेम्पुरा सभी डीप फ्राई किए जाते हैं। यह विधि तेज़ है। परिणाम स्वादिष्ट होता है। तकनीक सटीक है। तेल पर्याप्त गर्म होना चाहिए। भोजन सूखा होना चाहिए। बर्तन गहरा होना चाहिए। रसोइया सावधान होना चाहिए।
डीप फ्राइंग मैलार्ड अभिक्रिया और निर्जलीकरण के कारण काम करती है। गर्म तेल सतह को तेजी से पका देता है, जिससे नमी अंदर ही बंद हो जाती है। भाप ऊपरी परत से बाहर निकलती है, जिससे बुलबुले बनते हैं। ऊपरी परत कुरकुरी और स्वादिष्ट हो जाती है। अंदर का भाग भाप से पकता है। खाना थोड़ा तेल सोख लेता है, लेकिन उतना नहीं जितना लोग सोचते हैं। सही तरीके से तला हुआ खाना चिकना नहीं होता। खराब तरीके से तला हुआ खाना चिकना होता है। अंतर तापमान का है। अगर तेल बहुत ठंडा हो, तो खाना तेल सोख लेता है और गीला हो जाता है। अगर तेल बहुत गर्म हो, तो खाना बाहर से जल जाता है और अंदर से कच्चा रह जाता है। रसोइए को आंच को नियंत्रित करना चाहिए। रसोइए को तेल पर नजर रखनी चाहिए। रसोइए को तापमान में बदलाव करना चाहिए।
डीप फ्राइंग के कई नियम हैं। तेल साफ होना चाहिए। पुराना तेल स्वाद बिगाड़ देता है। खाना सूखा होना चाहिए। पानी से तेल छिटक सकता है। खाना कमरे के तापमान पर होना चाहिए। ठंडा खाना तेल का तापमान कम कर देता है। खाना एक साथ ज्यादा नहीं रखना चाहिए। ज्यादा रखने से तेल का तापमान कम हो जाता है। खाने से अतिरिक्त तेल निकाल देना चाहिए। खाने में मसाले डालने चाहिए। नमक तुरंत डालना चाहिए। नतीजा होता है कुरकुरा, सुनहरा और स्वादिष्ट खाना। यही है फ्राई। फ्राई ही इनाम है। तेल एक औजार है। रसोइया उस्ताद है। फ्राई ही मास्टरपीस है। फ्राई ही डीप फ्राई है। डीप फ्राई ही रसोइया है। रसोइया ही फ्राई है। फ्राई ही खाना है। खाना ही भोजन है। भोजन ही इनाम है।
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