डायरेक्ट करंट मोटर डीसी बिजली से चलती है। बैटरी लगाने पर यह घूमने लगती है। ध्रुवता उलटने पर यह दूसरी दिशा में घूमने लगती है। इसी सरलता के कारण डीसी मोटर पहली व्यावहारिक इलेक्ट्रिक मोटर बनीं और आज भी इनका उपयोग खिलौनों से लेकर रोबोट के जोड़ों तक हर चीज में होता है।
ब्रश्ड डीसी मोटर में वाइंडिंग में करंट की दिशा बदलने के लिए मैकेनिकल कम्यूटेटर का उपयोग किया जाता है। यह सस्ता और नियंत्रित करने में आसान होता है, लेकिन जल्दी खराब हो जाता है। ब्रशलेस डीसी मोटर में कम्यूटेटर की जगह इलेक्ट्रॉनिक स्विचिंग का उपयोग किया जाता है। यह अधिक समय तक चलता है, कम गर्म होता है और आकार के हिसाब से अधिक टॉर्क उत्पन्न करता है। आधुनिक रोबोटिक्स, ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहनों में ब्रशलेस मोटरों का ही उपयोग होता है।
डीसी मोटर की विशेषताएं
- गति वोल्टेज के समानुपाती होती है।
- टॉर्क धारा के समानुपाती होता है।
- ब्रश्ड मोटर्स: सरल, सस्ती, रखरखाव की अधिक आवश्यकता वाली।
- ब्रशलेस मोटर: कुशल, टिकाऊ, नियंत्रक की आवश्यकता होती है।
- गियरबॉक्स गति के बदले टॉर्क प्रदान करते हैं।
नियंत्रण प्रक्रिया सीधी-सादी है। पल्स चौड़ाई मॉड्यूलेशन औसत वोल्टेज को बदलकर गति निर्धारित करता है। एच-ब्रिज दिशा परिवर्तन की सुविधा देता है। एनकोडर क्लोज्ड-लूप नियंत्रण के लिए स्थिति संबंधी फीडबैक प्रदान करते हैं। डीसी मोटर देखने में आकर्षक नहीं है, लेकिन गति का मूल आधार है। रोबोट का हर जोड़, हर कन्वेयर बेल्ट, कार की हर इलेक्ट्रिक खिड़की, सब कुछ इसी पर निर्भर करता है। गतिमान मशीनें बनाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए इसकी कार्यप्रणाली को समझना मूलभूत है।
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