चक्रीय तर्क एक ऐसी भ्रांति है जिसमें निष्कर्ष को आधार वाक्य में ही मान लिया जाता है। यह तर्क एक ही बात को बार-बार दोहराता है। यह स्वयं का समर्थन करता है। यह कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं करता। निष्कर्ष का उपयोग आधार वाक्य को सिद्ध करने के लिए किया जाता है, और आधार वाक्य का उपयोग निष्कर्ष को सिद्ध करने के लिए किया जाता है। इस प्रकार कुछ भी सिद्ध नहीं होता।
इसका सर्वमान्य उदाहरण: मैं भरोसेमंद हूँ क्योंकि मैं हमेशा सच बोलता हूँ। यह कथन कि मैं हमेशा सच बोलता हूँ, इस निष्कर्ष को पुष्ट करता है कि मैं भरोसेमंद हूँ। यह तर्क चक्रीय है। एक अन्य उदाहरण: यह कथन सत्य है क्योंकि यह असत्य नहीं है। यह कथन निष्कर्ष को पुष्ट करता है। यह तर्क निरर्थक है।
चक्रीय तर्क के उदाहरण
- अलौकिक घटनाएं वास्तविक होती हैं क्योंकि बहुत से लोगों ने इनका अनुभव किया है।
- बाइबल सत्य है क्योंकि यह ईश्वर का वचन है।
- वह एक अच्छा नेता है क्योंकि वह अच्छे से नेतृत्व करता है।
- यह नीति सही है क्योंकि यह उचित है।
- मुझे पता है कि यह सच है क्योंकि मैं इस पर विश्वास करता हूं।
चक्रीय तर्क एक बंद चक्र है। इसे नकारा नहीं जा सकता क्योंकि यह बाहरी प्रमाणों से नहीं जुड़ता। यह स्व-निहित है। तर्क प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को यह विश्वसनीय लगता है। वे आधार वाक्य पर विश्वास करते हैं। वे निष्कर्ष पर विश्वास करते हैं। वे चक्र को नहीं देख पाते। इसका उपाय यह पूछना है: निष्कर्ष से स्वतंत्र रूप से आधार वाक्य का समर्थन करने वाले प्रमाण क्या हैं? यदि आधार वाक्य केवल निष्कर्ष का पुनर्कथन है, तो तर्क चक्रीय है। चक्रीय तर्क राजनीति, धर्म और व्यक्तिगत संबंधों में आम है। यह प्रमाणों से बचने का एक तरीका है। यह मान्यताओं को चुनौती से बचाता है। यह एक बंद प्रणाली है। इसे मिथ्या सिद्ध नहीं किया जा सकता। यही इसकी कमजोरी है। जिस तर्क को मिथ्या सिद्ध नहीं किया जा सकता, उसे सिद्ध नहीं किया जा सकता। वह बस होता है। चक्रीय तर्क एक चक्र है। यह कहीं नहीं जाता।
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