धीमी आंच पर पकाने में भोजन को उबलने के तापमान से थोड़ा कम तापमान पर तरल में पकाया जाता है। तरल को 85 से 95 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है। बर्तन के तले में छोटे-छोटे बुलबुले बनते हैं। ये धीरे-धीरे उठते हैं और धीरे से फूटते हैं। भोजन समान रूप से पकता है। यह नरम और नमीयुक्त रहता है। धीमी आंच पर पकाना ही वह विधि है। धीमी आंच पर पकाना बिल्कुल वैसा ही है।
धीमी आँच पर पकाने के लिए सही तापमान ज़रूरी है। तरल पदार्थ उबलना नहीं चाहिए। उबलने से खाना सख्त हो जाता है। उबलने से खाना टूट जाता है। रसोइए को बर्तन पर नज़र रखनी चाहिए। आँच को नियंत्रित करना चाहिए। ढक्कन का इस्तेमाल करना चाहिए। धैर्य रखना चाहिए। धीमी आँच पर पकाना एक तकनीक है। तकनीक ही धीमी आँच है। धीमी आँच एक ही है।
कई व्यंजनों में धीमी आंच पर पकाना शामिल है। स्टू धीमी आंच पर पकता है। सूप धीमी आंच पर पकता है। सॉस धीमी आंच पर पकता है। स्टॉक धीमी आंच पर पकता है। धीमी आंच पर पकाना ही तैयारी है। तैयारी ही धीमी आंच पर पकाना है। धीमी आंच पर पकाना एक ही है। रसोई एक ही है। रसोई धीमी आंच पर पकाना है। धीमी आंच पर पकाना ही रसोइया है। रसोइया धीमी आंच पर पकाना है। धीमी आंच पर पकाना एक ही है। भोजन एक ही है। भोजन धीमी आंच पर पकाना है। धीमी आंच पर पकाना एक ही है।
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