दिमित्री मेंडेलीव ने 1869 में पहली व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त आवर्त सारणी प्रकाशित की। उन्होंने तत्वों को परमाणु भार के आधार पर व्यवस्थित किया और पाया कि उनके गुणधर्म आवर्त रूप से दोहराए जाते हैं। उन्होंने उन तत्वों के लिए स्थान छोड़े जो अभी तक खोजे नहीं गए थे और उनके गुणों की भविष्यवाणी की। जब गैलियम और जर्मेनियम की खोज हुई, तो उनकी भविष्यवाणियाँ सही साबित हुईं। आवर्त सारणी रसायन विज्ञान का आधारभूत ढाँचा बन गई।
आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु भार के बजाय परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया गया है। इसमें 118 तत्व हैं, जिन्हें आवर्तों (पंक्तियों) और समूहों (स्तंभों) में विभाजित किया गया है। एक ही समूह के तत्वों में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है और उनके रासायनिक गुण भी लगभग समान होते हैं। समूह 1 के तत्व क्षार धातुएँ हैं। समूह 18 के तत्व उत्कृष्ट गैसें हैं। इलेक्ट्रॉन उपस्तर के आधार पर सारणी को s, p, d और f ब्लॉकों में विभाजित किया गया है।
आवर्त सारणी से प्रवृत्तियाँ स्पष्ट होती हैं। परमाणु त्रिज्या एक आवर्त में घटती है और एक समूह में घटती है। आयनीकरण ऊर्जा एक आवर्त में बढ़ती है और एक समूह में घटती है। विद्युत ऋणात्मकता भी इसी प्रकार की प्रवृत्ति का अनुसरण करती है। इन प्रवृत्तियों की व्याख्या नाभिकीय आवेश में वृद्धि और आंतरिक इलेक्ट्रॉनों के परिरक्षण प्रभाव द्वारा की जाती है।
आवर्त सारणी महज एक चार्ट से कहीं अधिक है। यह एक पूर्वानुमान उपकरण है। किसी तत्व की स्थिति जानने से उसके गुण, उसकी क्रियाशीलता और उसके संभावित यौगिकों का पता चलता है। यह रासायनिक जगत का नक्शा है।
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