परमाणु क्रमांक किसी परमाणु के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या होती है। यह किसी तत्व की पहचान होती है। हाइड्रोजन में एक प्रोटॉन होता है, इसलिए इसका परमाणु क्रमांक 1 है। हीलियम में दो प्रोटॉन होते हैं, इसलिए इसका परमाणु क्रमांक 2 है। कार्बन में छह प्रोटॉन होते हैं। सोने में 79 प्रोटॉन होते हैं। आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित है। परमाणु क्रमांक को आमतौर पर तत्व के चिह्न से पहले उपलिपि के रूप में लिखा जाता है।
परमाणु क्रमांक किसी तत्व का निर्धारण करता है। प्रोटॉनों की संख्या बदलने से तत्व बदल जाता है। नाइट्रोजन में एक प्रोटॉन जोड़ने से ऑक्सीजन प्राप्त होता है। सोने से एक प्रोटॉन हटाने से प्लैटिनम प्राप्त होता है। न्यूट्रॉनों की संख्या बदलने से तत्व नहीं बदलता, लेकिन प्रोटॉनों की संख्या नहीं बदलती। इसीलिए परमाणु क्रमांक किसी तत्व का मूलभूत गुण है।
एक उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है। इसलिए परमाणु क्रमांक से यह भी पता चलता है कि परमाणु में कितने इलेक्ट्रॉन हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इलेक्ट्रॉन ही रासायनिक व्यवहार निर्धारित करते हैं। आवर्त सारणी के एक ही समूह में स्थित तत्वों में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, यही कारण है कि उनके गुणधर्म भी समान होते हैं। परमाणु क्रमांक नाभिक को इलेक्ट्रॉन समूह से जोड़ता है।
इस अवधारणा को हेनरी मोस्ले ने 1913 में विकसित किया था। उन्होंने दिखाया कि आवर्त सारणी में किसी तत्व का स्थान परमाणु भार से नहीं, बल्कि परमाणु क्रमांक से निर्धारित होता है। उनके कार्य ने मेंडेलीव की मूल सारणी में मौजूद विसंगतियों को दूर किया और आधुनिक आवर्त नियम की नींव रखी।
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