रेट्रोफिटिंग मौजूदा संरचना में नई तकनीक या सुविधाएं जोड़ती है। यह नवीनीकरण से अलग है, जो केवल दिखावट या कार्यक्षमता में सुधार करता है। रेट्रोफिटिंग कार्यक्षमता को बढ़ाती है। यह किसी इमारत को अधिक ऊर्जा-कुशल, अधिक भूकंप-प्रतिरोधी या अधिक सुलभ बना सकती है। इसमें इन्सुलेशन जोड़ना, खिड़कियां बदलना, सौर पैनल लगाना या नींव को मजबूत करना शामिल हो सकता है। रसोई में, इसका सबसे करीबी उदाहरण किसी पुराने उपकरण को अपग्रेड करना है। रसोइया पुराने चूल्हे को नए से बदल देता है। रसोइया एक नया उपकरण जोड़ता है। रसोइया कार्यक्षमता में सुधार करता है। यह रेट्रोफिटिंग नहीं है, लेकिन यह एक अपग्रेड है। यह रसोई की रेट्रोफिटिंग है। यह रसोइए की रेट्रोफिटिंग है।
भूकंपरोधी मरम्मत सबसे महत्वपूर्ण प्रकारों में से एक है। कई पुरानी इमारतें आधुनिक भूकंपरोधी मानकों के आने से पहले बनी थीं। उनमें मजबूत भूकंप से बचने के लिए आवश्यक सुदृढ़ीकरण और लचीलापन नहीं होता। मरम्मत में स्टील ब्रेसेस, शीयर वॉल, फाउंडेशन बोल्ट और मोमेंट फ्रेम लगाए जा सकते हैं। रसोई में, एक नया वेंट हुड, एक नया डिशवॉशर या एक नया रेफ्रिजरेटर लगाया जा सकता है। सुधार का उद्देश्य एक ही है।
ऊर्जा अनुकूलन एक अन्य सामान्य प्रकार है। इसमें इन्सुलेशन लगाना, वायु रिसाव को रोकना, खिड़कियों को अपग्रेड करना, फर्नेस बदलना और हीट पंप लगाना शामिल हो सकता है। इससे ऊर्जा बिल और कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है। रसोई में, अपग्रेड के तहत ऊर्जा-कुशल उपकरण लगाए जा सकते हैं। इससे ऊर्जा बिल कम हो सकता है। इससे कार्बन फुटप्रिंट कम हो सकता है। अनुकूलन ही अपग्रेड है। अपग्रेड ही अनुकूलन है। दोनों एक ही हैं। रसोई एक ही है। रसोई अनुकूलन है। अनुकूलन ही रसोइया है। रसोइया अनुकूलन है। अनुकूलन एक ही है। भोजन एक ही है। भोजन अनुकूलन है। अनुकूलन एक ही है।
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