कर्म किसी व्यक्ति के कार्यों का योग है जो उसके भविष्य का निर्धारण करता है। यह शब्द संस्कृत से आया है, जिसका अर्थ है क्रिया या कर्म। यह कारण और परिणाम का नियम है। यह ब्रह्मांड का नैतिक नियम है। यह न्याय का सिद्धांत है। यह 'जैसा बोओगे वैसा काटोगे' का सिद्धांत है। यह परिणामों का सिद्धांत है। यह पुनर्जन्म का सिद्धांत है। यह संसार का सिद्धांत है। यह मुक्ति का सिद्धांत है। यह कर्म का सिद्धांत है।
कर्म हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म का केंद्रबिंदु है। यह मान्यता है कि प्रत्येक कर्म का फल होता है। अच्छे कर्मों से अच्छा कर्म उत्पन्न होता है। बुरे कर्मों से बुरा कर्म उत्पन्न होता है। कर्म ही अगले जीवन की गुणवत्ता निर्धारित करता है। यह पुनर्जन्म की परिस्थितियों को निर्धारित करता है। यह जीवन के दुख और सुख को निर्धारित करता है। यह मुक्ति का मार्ग निर्धारित करता है। यह मोक्ष का मार्ग निर्धारित करता है। यह निर्वाण का मार्ग निर्धारित करता है। यह स्वतंत्रता का मार्ग निर्धारित करता है। यह शांति का मार्ग निर्धारित करता है। यह कर्म का मार्ग निर्धारित करता है।
पूर्वी धर्मों में कर्म
- हिंदू धर्म: कर्म ही जाति और पुनर्जन्म का निर्धारण करता है।
- बौद्ध धर्म: कर्म का अर्थ है इरादा और क्रिया।
- जैन धर्म: कर्म एक भौतिक पदार्थ है।
- सिख धर्म: कर्मों पर कृपा से विजय प्राप्त की जा सकती है।
- योग: कर्म योग, कर्म का मार्ग है।
- भक्ति: भक्ति कर्म से परे है।
कर्म भाग्य नहीं है। यह पूर्वनियति नहीं है। यह नियतिवाद नहीं है। यह नियतिवाद नहीं है। यह कर्म का नियम है। यह चुनाव का नियम है। यह उत्तरदायित्व का नियम है। यह स्वतंत्रता का नियम है। यह परिणाम का नियम है। यह न्याय का नियम है। यह दया का नियम है। यह प्रेम का नियम है। यह जीवन का नियम है। यह मृत्यु का नियम है। यह पुनर्जन्म का नियम है। यह मुक्ति का नियम है। यह कर्म का नियम है। यह नियम वास्तविक है। यह नियम न्यायपूर्ण है। यह नियम निष्पक्ष है। यह नियम सार्वभौमिक है। यह नियम शाश्वत है। यह नियम कर्म है। जैसा बोओगे वैसा काटोगे। जैसा दोगे वैसा पाओगे। जैसा करोगे वैसा बनोगे। यही कर्म है। यही नियम है। यही सत्य है। यही मार्ग है। यही रास्ता है। यही जीवन है। यही मृत्यु है। यही पुनर्जन्म है। यही मुक्ति है। यही कर्म है।
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