मणिकेवाद एक प्राचीन द्वैतवादी धर्म है जिसकी स्थापना मानी ने की थी। मानी एक फारसी पैगंबर थे। वे तीसरी शताब्दी ईस्वी में रहते थे। उन्होंने प्रकाश और अंधकार के धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने अच्छाई और बुराई के धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने आत्मा और पदार्थ के धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने मोक्ष के धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने ज्ञान के धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने तपस्या के धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने मिशन के धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने संसार के धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने मणिकेवाद धर्म का उपदेश दिया।
मणिकीवाद द्वैतवादी है। यह दो शाश्वत सिद्धांतों की शिक्षा देता है: प्रकाश और अंधकार, अच्छाई और बुराई, आत्मा और पदार्थ, ईश्वर और शैतान। ये दोनों परस्पर विरोधी हैं। प्रकाश पदार्थ में फंसा हुआ है, आत्मा शरीर में फंसी हुई है। मोक्ष प्रकाश को अंधकार से मुक्त करना है, मोक्ष आत्मा को शरीर से मुक्त करना है, मोक्ष आत्मा को पदार्थ से मुक्त करना है। मोक्ष सत्य का ज्ञान है, मोक्ष प्रकाश का ज्ञान है, मोक्ष आत्मज्ञान है, मोक्ष ईश्वर का ज्ञान है, मोक्ष मणि का ज्ञान है, मोक्ष मणिकीवाद का ज्ञान है।
मैनिचियन मान्यताएँ
- द्वैतवाद: दो शाश्वत सिद्धांत, प्रकाश और अंधकार।
- ज्ञान: गुप्त ज्ञान के माध्यम से मुक्ति।
- वैराग्य: भौतिक संसार का त्याग।
- निर्वाचित: आध्यात्मिक अभिजात वर्ग, ब्रह्मचारी और शाकाहारी।
- श्रोता: साधारण विश्वासी, जिन्होंने चुने हुए लोगों का समर्थन किया।
- मिशन: मिशनरियों के माध्यम से धर्म का प्रसार करना।
- ब्रह्मांड विज्ञान: प्रकाश के कारावास का एक जटिल मिथक।
मणिकेवाद एक प्रमुख धर्म था। यह फारस से चीन तक फैला। यह रोम से भारत तक फैला। यह अफ्रीका से मैदानी इलाकों तक फैला। यह एक सार्वभौमिक धर्म था। यह एक प्रचारक धर्म था। यह ईसाई धर्म का प्रतिद्वंद्वी था। यह बौद्ध धर्म का प्रतिद्वंद्वी था। यह पारसी धर्म का प्रतिद्वंद्वी था। यह इस्लाम का प्रतिद्वंद्वी था। इसने ऑगस्टीन को प्रभावित किया। ईसाई बनने से पहले वे मणिकेवादी थे। उन्होंने इसके विरुद्ध लिखा। उन्होंने इसका खंडन किया। उन्होंने इसे अस्वीकार किया। वे बिशप बने। वे संत बने। वे डॉक्टर बने। वे पिता बने। वे ईसाई बने। वे ऑगस्टीन बने। मणिकेवाद लुप्त हो गया। इस पर अत्याचार हुआ। इसे दबाया गया। इसे नष्ट किया गया। इसे भुला दिया गया। फिर इसे पुनः खोजा गया। इसका अध्ययन किया गया। इसे समझा गया। यह मणिकेवाद था। यह प्रकाश और अंधकार का धर्म है। यह अच्छाई और बुराई का धर्म है। यह आत्मा और पदार्थ का धर्म है। यह मोक्ष का धर्म है। यह ज्ञान का धर्म है। यह तपस्या का धर्म है। यह मिशन का धर्म है। यह विश्व का धर्म है। यह मणिकीवाद है।
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