हदीस पैगंबर मुहम्मद के कथनों और कार्यों का संकलन है। कुरान के बाद यह इस्लाम का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। कुरान अल्लाह का वचन है। हदीस पैगंबर के वचन और कर्मों का संग्रह है। यह कुरान की व्याख्या करती है। यह उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह मार्गदर्शन प्रदान करती है। इस्लाम को समझने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। यह सुन्नत, यानी पैगंबर के मार्ग का अभिलेख है।
हदीस पीढ़ियों तक मौखिक रूप से प्रसारित होती रही। इसका संकलन 9वीं शताब्दी में हुआ। सबसे प्रामाणिक संग्रह सहीह अल-बुखारी और सहीह मुस्लिम हैं। इन्हें प्रामाणिक माना जाता है। अन्य संग्रहों में सुनन अबू दाऊद, सुनन अल-तिर्मिज़ी, सुनन अल-नसाई और सुनन इब्न माजा शामिल हैं। हदीस के प्रसारण की श्रृंखला को सत्यापित करने के लिए हदीस आलोचना विज्ञान विकसित किया गया था। प्रत्येक हदीस की एक कथावाचक श्रृंखला होती है। यदि श्रृंखला विश्वसनीय है, तो हदीस विश्वसनीय है। यदि श्रृंखला कमजोर है, तो हदीस कमजोर है। इस विज्ञान को इल्म अल-रिजाल, यानी मनुष्यों का विज्ञान कहा जाता है।
हदीस वर्गीकरण
- सहीह: विश्वसनीय, प्रामाणिक।
- हसन: अच्छा, स्वीकार्य।
- दाइफ़: कमज़ोर, अविश्वसनीय।
- 'मौदु': मनगढ़ंत, झूठा।
- मुतावातिर: बड़े पैमाने पर प्रसारित, निश्चित।
हदीस एक विशाल ग्रंथ है। इसमें कानून, धर्मशास्त्र, नैतिकता, उपासना और दैनिक जीवन का समावेश है। इसमें कहानियां, संवाद और क्रियाएं शामिल हैं। यह मुहम्मद के जीवन की एक झलक प्रस्तुत करता है। यह प्रेरणा का स्रोत है। यह कानून का स्रोत है। यह मार्गदर्शन का स्रोत है। हालांकि, यह विवादों से परे नहीं है। कुछ हदीसों पर विवाद हैं। कुछ का उपयोग हिंसा को उचित ठहराने के लिए किया जाता है। कुछ का उपयोग शांति को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। मुसलमान इनकी अलग-अलग व्याख्या करते हैं। हदीस एक समृद्ध और जटिल परंपरा है। यह पैगंबर की स्मृति है। यह इस्लाम का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। यह हदीस है।
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