अपने देश के प्रति स्नेह और उसकी भलाई के लिए तत्परता ही देशभक्ति है। यह एक भावनात्मक और नागरिक लगाव है जो सेवा, त्याग और रचनात्मक आलोचना को प्रेरित कर सकता है।
देशभक्ति, आक्रामक राष्ट्रवाद से इस मायने में भिन्न है कि इसमें आमतौर पर जातीय श्रेष्ठता के बजाय राजनीतिक संस्थाओं और साझा नागरिक आदर्शों के प्रति निष्ठा पर बल दिया जाता है। देशभक्ति से जुड़े रीति-रिवाज—झंडे, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय अवकाश—साझा पहचान को सुदृढ़ करते हैं। इस बात पर बहस छिड़ी रहती है कि क्या देशभक्ति के लिए बिना सोचे-समझे समर्थन आवश्यक है या क्या असहमति स्वयं देश के सिद्धांतों के प्रति देशभक्तिपूर्ण चिंता का एक रूप हो सकती है।
राजनीतिक नेता नीतियों और युद्धों के लिए समर्थन जुटाने हेतु देशभक्ति का आह्वान करते हैं। विरोधी इन आह्वान की सत्यनिष्ठा या विषयवस्तु पर सवाल उठा सकते हैं। स्वस्थ लोकतांत्रिक संस्कृति में असहमति को राजद्रोह माने बिना राजनीतिक समुदाय के प्रति लगाव व्यक्त करने के अनेक तरीके स्वीकार्य होते हैं।
- अपने देश के प्रति प्रेम और निष्ठा
- यह सेवा और नागरिक सहभागिता को प्रेरित कर सकता है।
- जातीय कट्टरता से अलग
- वर्तमान नीतियों की आलोचना के अनुरूप
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