मिट्टी के बर्तन बनाना मिट्टी से वस्तुएं बनाने और उन्हें उच्च तापमान पर पकाने की कला है। मिट्टी को आकार दिया जाता है, सुखाया जाता है और फिर पकाया जाता है। गर्मी से मिट्टी एक कठोर और टिकाऊ पदार्थ में बदल जाती है। मिट्टी के बर्तन बनाना सबसे प्राचीन शिल्पों में से एक है। यह सबसे बहुमुखी शिल्पों में से भी एक है। कुम्हार कटोरे, प्लेटें, फूलदान और मूर्तियां बनाता है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाला कारीगर टाइलें, ईंटें और औद्योगिक उपकरण बनाता है। दोनों शिल्पों का मूल स्वरूप एक ही है।
मिट्टी के बर्तन बनाने की कला कई रूपों में पाई जाती है। हस्त-निर्माण में हाथों से मिट्टी को आकार दिया जाता है। चाक पर मिट्टी को आकार देने में सांचा भरा जाता है। स्लिप कास्टिंग में तरल मिट्टी को सांचे में डाला जाता है। प्रेस मोल्डिंग में मिट्टी को सांचे में दबाया जाता है। प्रत्येक तकनीक का अपना अलग परिणाम होता है। प्रत्येक तकनीक की अपनी कला होती है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाला कलाकार तकनीक का चुनाव करता है। तकनीक ही मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कलाकार की पहचान है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाला कलाकार एक ही होता है।
मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए भट्टी की आवश्यकता होती है। भट्टी में मिट्टी को पकाया जाता है। भट्टी का तापमान 1,000 से 1,300 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। मिट्टी कांच जैसी बन जाती है। मिट्टी से सिरेमिक बनता है। सिरेमिक ही परिणाम है। सिरेमिक ही शिल्प है। सिरेमिक एक ही है। कुम्हार एक ही है। कुम्हार ही सिरेमिक है। सिरेमिक ही कुम्हार है। सिरेमिक एक ही है।
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