किसी जनसंख्या में अक्सर अलग-अलग उपसमूह होते हैं। स्तरीकृत नमूनाकरण विधि जनसंख्या को इन उपसमूहों (स्तरों) में विभाजित करती है और फिर प्रत्येक से एक नमूना लेती है। यह विधि सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक महत्वपूर्ण उपसमूह का प्रतिनिधित्व हो, जिससे सटीकता में सुधार हो सकता है और प्रत्येक स्तर का अलग-अलग विश्लेषण संभव हो सकता है।
शोध प्रश्न से संबंधित विशेषताओं—आयु, क्षेत्र, ग्राहक वर्ग या उत्पाद श्रेणी—के आधार पर स्तर परिभाषित किए जाते हैं। प्रत्येक स्तर के भीतर नमूनों का आकार स्तर के अनुपात में हो सकता है या यदि विभिन्न स्तरों के बीच तुलना करना प्राथमिकता है तो समान भी हो सकता है। प्रत्येक स्तर के भीतर, चयन आमतौर पर यादृच्छिक होता है।
स्तरीकृत नमूनाकरण (Stratified sampling) सरल यादृच्छिक नमूनाकरण (simple random sampling) की तुलना में अधिक जटिल होता है, लेकिन प्रतिनिधित्व और दक्षता में होने वाला लाभ अक्सर इस प्रयास को सार्थक साबित करता है। इसका व्यापक रूप से उपयोग जनमत अनुसंधान, बाजार अनुसंधान और गुणवत्ता नियंत्रण में किया जाता है, खासकर तब जब जनसंख्या विषम विविधता से भरी हो। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि अध्ययन किए जा रहे चरों के लिए उपयुक्त स्तरों का चयन किया जाए।
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