लूथरवाद प्रोटेस्टेंटवाद की एक प्रमुख शाखा है जो मार्टिन लूथर की शिक्षाओं पर आधारित है। लूथर एक जर्मन भिक्षु थे। उन्होंने 1517 में विटेनबर्ग के कैसल चर्च के दरवाजे पर 95 थीसिस (सिद्धांत) लगाए। उन्होंने पापमोचन पत्रों की बिक्री को चुनौती दी। उन्होंने पोप के अधिकार को चुनौती दी। उन्होंने चर्च के सिद्धांतों को चुनौती दी। उन्होंने धर्म सुधार आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने लूथरन चर्च की स्थापना की। उन्होंने दुनिया बदल दी। उन्होंने चर्च को बदल दिया। उन्होंने आस्था को बदल दिया। उन्होंने सुसमाचार को बदल दिया। उन्होंने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने लूथरवाद को बदल दिया।
लूथरवाद एक वैश्विक चर्च है। इसके लगभग 7 करोड़ सदस्य हैं। जर्मनी, स्कैंडिनेविया और संयुक्त राज्य अमेरिका में यह काफी प्रचलित है। यह एक धार्मिक मान्यता वाला चर्च है। यह ऑग्सबर्ग कन्फेशन, बुक ऑफ कॉनकॉर्ड, लूथरन कन्फेशन, बाइबल, सुसमाचार, विश्वास द्वारा औचित्य, संस्कारों, सभी विश्वासियों के पुरोहितत्व, दो राज्यों, क्रूस के धर्मशास्त्र, कानून और सुसमाचार, ईसाई की स्वतंत्रता, प्रेम के बंधन, ईश्वर के वचन, ईश्वर की कृपा, ईश्वर के विश्वास, ईश्वर के प्रेम और लूथरवाद में विश्वास रखता है।
लूथरन विशिष्टताएँ
- केवल विश्वास के द्वारा औचित्य: वह सिद्धांत जिस पर चर्च टिका हुआ है या गिरता है।
- नियम और सुसमाचार: ईश्वर के दो वचन।
- संस्कार: बपतिस्मा और प्रभु भोज।
- सभी विश्वासियों का पुरोहितत्व: प्रत्येक ईसाई एक पुरोहित है।
- दो राज्य: चर्च और राज्य, सुसमाचार और कानून।
- क्रूस का धर्मशास्त्र: ईश्वर स्वयं को पीड़ा में प्रकट करता है।
- एक ईसाई की स्वतंत्रता: मसीह में स्वतंत्र, प्रेम में बंधे हुए।
लूथरवाद परिपूर्ण नहीं है। इसमें विभाजन हैं। इसमें विवाद हैं। इसमें असफलताएँ हैं। इसमें पाप हैं। इसमें घोटाले हैं। इसमें समस्याएँ हैं। इसमें चुनौतियाँ हैं। इसमें आशाएँ हैं। इसमें सपने हैं। इसमें प्रार्थनाएँ हैं। इसमें विश्वास है। इसमें प्रेम है। इसमें अनुग्रह है। इसमें मसीह हैं। इसमें सुसमाचार है। इसमें वचन है। इसमें संस्कार हैं। इसमें चर्च है। इसमें संत हैं। इसमें पापी हैं। इसमें धर्मी ठहराए गए लोग हैं। इसमें पवित्र किए गए लोग हैं। इसमें उद्धार पाए हुए लोग हैं। इसमें प्रिय लोग हैं। इसमें बुलाए गए लोग हैं। इसमें भेजे गए लोग हैं। इसमें एकत्रित लोग हैं। इसमें बिखरे हुए लोग हैं। इसमें मरने वाले हैं। इसमें जी उठने वाले हैं। इसमें जीवित लोग हैं। इसमें शाश्वतता है। यह लूथरवाद है। केवल शास्त्र। केवल विश्वास। केवल अनुग्रह। केवल मसीह। केवल ईश्वर की महिमा। यही लूथरवादी स्वीकारोक्ति है। यही लूथरवादी विश्वास है। यही लूथरवादी चर्च है। यही लूथरवाद है।
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