लकड़ी के टुकड़ों को धातु के बंधनों के बिना जोड़ने की कला को जोड़-तोड़ कहते हैं। यह उत्तम लकड़ी के काम की बुनियाद है। जोड़ ही जुड़ाव है। जोड़ ही मजबूती है। जोड़ ही सुंदरता है। जोड़-तोड़ करने वाला ही कारीगर है। जोड़-तोड़ करने वाला एक ही है।
जोड़-तोड़ कई प्रकार के होते हैं। डॉवेटेल जोड़ मजबूत और सुंदर होता है। मोर्टिस और टेनन जोड़ मजबूत और छिपा हुआ होता है। फिंगर जोड़ सरल और मजबूत होता है। लैप जोड़ आसान और मजबूत होता है। प्रत्येक का अपना उपयोग है। प्रत्येक की अपनी कला है। जोड़-तोड़ एक प्रकार है। प्रकार ही जोड़-तोड़ है। जोड़-तोड़ एक ही है।
बढ़ईगीरी में सटीकता आवश्यक है। बढ़ई नापता है। बढ़ई काटता है। बढ़ई जोड़ को फिट करता है। बढ़ई गोंद लगाता है। जोड़ मज़बूत होता है। जोड़ वर्गाकार होता है। जोड़ टिकाऊ होता है। बढ़ईगीरी एक शिल्प है। शिल्प ही बढ़ईगीरी है। बढ़ईगीरी एक समान है। लकड़ी एक समान है। लकड़ी ही बढ़ईगीरी है। बढ़ईगीरी ही लकड़ी है। बढ़ईगीरी एक समान है। बढ़ई ही बढ़ईगीरी है। बढ़ईगीरी ही बढ़ई है। बढ़ईगीरी एक समान है।
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