आभूषण बनाना बहुमूल्य धातुओं से सजावटी वस्तुएँ बनाने की कला है। यह एक प्राचीन शिल्प है। आभूषण हजारों वर्षों से बनाए जा रहे हैं। इन्हें सजावट, प्रतिष्ठा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहना जाता है। जौहरी ही शिल्पकार होता है। जौहरी और आभूषण निर्माता एक ही हैं।
आभूषण बनाने की कला अनेक रूपों में आती है। मनकों को पिरोकर आभूषण बनाए जाते हैं। धातु को आकार दिया जाता है। रत्न तराशने में पत्थरों को काटा जाता है। तार लपेटने में तार मोड़ा जाता है। प्रत्येक कला की अपनी तकनीक होती है। प्रत्येक कला की अपनी कला होती है। आभूषण बनाना एक प्रकार है। प्रकार ही आभूषण बनाने की कला है। आभूषण बनाने की कला एक ही है।
आभूषण बनाने में अनेक सामग्रियों का उपयोग होता है। सोना, चांदी, प्लैटिनम, तांबा और पीतल धातुएँ हैं। हीरा, माणिक, नीलम और पन्ना रत्न हैं। मोती, मूंगा और अंबर प्राकृतिक पदार्थ हैं। प्रत्येक का अपना मूल्य है। प्रत्येक की अपनी सुंदरता है। आभूषण ही सामग्री है। सामग्री ही आभूषण है। आभूषण एक ही है। जौहरी एक ही है। जौहरी ही आभूषण है। आभूषण ही जौहरी है। आभूषण एक ही है।
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