कांच फूंकने की कला पिघले हुए कांच को हवा फूंककर आकार देने की कला है। कांच को भट्टी में तब तक गर्म किया जाता है जब तक वह पिघल न जाए। कांच फूंकने वाला कारीगर एक पाइप के सिरे पर कांच का एक गोला इकट्ठा करता है। वह पाइप में हवा फूंकता है। कांच फूल जाता है। फिर औजारों की मदद से उसे आकार दिया जाता है। कांच को धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। इस तरह कांच तैयार हो जाता है। कांच एक जैसा ही होता है।
कांच उड़ाने की कला कई प्रकार की होती है। बिना सांचे के कांच को आकार देने की कला में मुक्त उड़ाना शामिल है। सांचे में ढालकर कांच को आकार देना और मशाल की सहायता से कांच को आकार देना शामिल है। प्रत्येक कला की अपनी तकनीक और अपना हुनर है। कांच उड़ाना एक प्रकार है। प्रकार ही कांच उड़ाने की कला है। कांच उड़ाना एक ही है।
कांच बनाने में कौशल की आवश्यकता होती है। कांच बनाने वाले को ऊष्मा को नियंत्रित करना होता है। कांच बनाने वाले को वायु को नियंत्रित करना होता है। कांच बनाने वाले को आकार को नियंत्रित करना होता है। कांच बनाने वाला तेज़ी से काम करता है। कांच जल्दी ठंडा हो जाता है। कांच ही चुनौती है। कांच ही पुरस्कार है। कांच एक समान है। भट्टी एक समान है। भट्टी ही कांच है। कांच ही भट्टी है। कांच एक समान है। फूंक मारने वाली नली एक समान है। फूंक मारने वाली नली ही कांच है। कांच ही फूंक मारने वाली नली है। कांच एक समान है।
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