सुलेख कलम या ब्रश का उपयोग करके सजावटी लिखावट की कला है। यह शब्द ग्रीक शब्द 'कैलोस' से आया है, जिसका अर्थ है सुंदरता, और 'ग्राफेइन', जिसका अर्थ है लिखना। सुलेख केवल लिखना नहीं है, यह एक कला है। सुलेखक प्रत्येक अक्षर को आकार देता है। सुलेखक स्याही को नियंत्रित करता है। सुलेखक लय बनाता है। सुलेख भी इसी प्रकार है।
सुलेख कला कई परंपराओं में पाई जाती है। पश्चिमी सुलेख में लैटिन वर्णमाला का प्रयोग होता है। चीनी सुलेख में ब्रश और स्याही का प्रयोग होता है। अरबी सुलेख में अरबी लिपि का प्रयोग होता है। जापानी सुलेख में ब्रश और स्याही का प्रयोग होता है। प्रत्येक परंपरा के अपने उपकरण और अपनी शैली होती है। उपकरण हैं कलम, ब्रश, स्याही और कागज। शैली लिपि है। लिपि परंपरा है। परंपरा एक ही है।
सुलेख के लिए अभ्यास आवश्यक है। सुलेखक को स्ट्रोक सीखना चाहिए। उसे अनुपात सीखना चाहिए। उसे अक्षरों के बीच की दूरी सीखनी चाहिए। उसे लय सीखनी चाहिए। सुलेखक वर्षों तक अभ्यास करता है। वह उस्तादों से सीखता है। सुलेखक अपनी एक विशेष शैली विकसित करता है। वह शैली ही हस्ताक्षर है। वह हस्ताक्षर ही सुलेखक है। सुलेखक एक ही है। कला एक ही है। कला ही सुलेख है। सुलेख एक ही है।
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